
भारत में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी तय करने के लिए 7वें वेतन आयोग के तहत पे मैट्रिक्स सिस्टम लागू किया गया। पहले “ग्रेड पे” और “पे बैंड” का सिस्टम होता था, लेकिन अब इसे आसान और पारदर्शी बनाने के लिए लेवल आधारित पे मैट्रिक्स लागू किया गया है। अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या अपनी सैलरी संरचना समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है।
पे मैट्रिक्स क्या है?
पे मैट्रिक्स एक तालिका (Table) है जिसमें कर्मचारी का लेवल (Level) और सेवा के वर्ष (Years of Service) के अनुसार वेतन निर्धारित होता है। इसमें हर पद को एक विशेष लेवल दिया गया है और उसी लेवल के अनुसार बेसिक सैलरी तय होती है।
7वें वेतन आयोग के बाद “ग्रेड पे” शब्द भले ही आधिकारिक रूप से हट गया हो, लेकिन लोग अभी भी ग्रेड पे के आधार पर लेवल समझते हैं। उदाहरण के लिए:
- 1800 ग्रेड पे = लेवल 1
- 2400 ग्रेड पे = लेवल 4
- 4200 ग्रेड पे = लेवल 6
- 4600 ग्रेड पे = लेवल 7
- 5400 ग्रेड पे = लेवल 9
पे मैट्रिक्स लेवल और बेसिक सैलरी
नीचे कुछ प्रमुख लेवल और उनकी शुरुआती बेसिक सैलरी दी गई है:
| लेवल | पुराना ग्रेड पे | शुरुआती बेसिक सैलरी |
|---|---|---|
| लेवल 1 | 1800 | ₹18,000 |
| लेवल 2 | 1900 | ₹19,900 |
| लेवल 4 | 2400 | ₹25,500 |
| लेवल 6 | 4200 | ₹35,400 |
| लेवल 7 | 4600 | ₹44,900 |
| लेवल 10 | 5400 | ₹56,100 |
ध्यान दें कि यह केवल बेसिक पे है। इसके अलावा DA (महंगाई भत्ता), HRA (मकान किराया भत्ता), TA (यातायात भत्ता) आदि जोड़कर कुल सैलरी बनती है।
पे मैट्रिक्स कैसे काम करता है?
पे मैट्रिक्स में हर लेवल के सामने कई कॉलम होते हैं। जैसे-जैसे कर्मचारी की सेवा अवधि बढ़ती है, वह उसी लेवल के अगले सेल में आगे बढ़ता है। इसे Annual Increment कहा जाता है।
हर साल लगभग 3% की वृद्धि बेसिक पे में जुड़ती है। प्रमोशन मिलने पर कर्मचारी उच्च लेवल में चला जाता है और नई बेसिक सैलरी तय होती है।
7वां वेतन आयोग और पे मैट्रिक्स
7वां वेतन आयोग ने 2016 में पे मैट्रिक्स सिस्टम लागू किया। इसका मुख्य उद्देश्य था:
- सैलरी संरचना को सरल बनाना
- पारदर्शिता बढ़ाना
- प्रमोशन और इंक्रीमेंट को स्पष्ट करना
- पुराने पे बैंड सिस्टम की जटिलता खत्म करना
आज केंद्र सरकार और अधिकांश राज्य सरकारें इसी सिस्टम के आधार पर सैलरी देती हैं।
केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के लिए अंतर
केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें 7वें वेतन आयोग के ढांचे का पालन करती हैं, लेकिन DA और अन्य भत्तों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों का DA समय-समय पर केंद्र द्वारा घोषित किया जाता है, जबकि राज्य अपने अनुसार निर्णय लेते हैं।
पे मैट्रिक्स का महत्व
- सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सैलरी अनुमान
- प्रमोशन और करियर ग्रोथ की स्पष्ट जानकारी
- पेंशन और रिटायरमेंट लाभ की गणना में सहायक
- वेतन विसंगति (Pay Anomaly) समझने में मददगार
ग्रेड पे से लेवल कैसे पहचानें?
यदि आपके पास पुराना ग्रेड पे है, तो आप उसे नए लेवल में बदलकर अपनी वर्तमान बेसिक सैलरी समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए:
- 4200 ग्रेड पे वाले कर्मचारी अब लेवल 6 में आते हैं
- 4600 ग्रेड पे = लेवल 7
- 5400 ग्रेड पे = लेवल 9 या 10 (पद के अनुसार)
निष्कर्ष
पे मैट्रिक्स सिस्टम ने सरकारी वेतन संरचना को सरल और पारदर्शी बना दिया है। यदि आप सरकारी कर्मचारी हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने पद का लेवल और उससे जुड़ी बेसिक सैलरी जरूर समझें। इससे आपको भविष्य की सैलरी वृद्धि और प्रमोशन की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।