
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी भुगतान और लेखा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तेज़ और काग़ज़-रहित बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। Public Financial Management System (PFMS) के माध्यम से ई-बिल (e-Bill) के सुचारु उपयोग को लेकर Controller General of Accounts (CGA), Ministry of Finance द्वारा आवश्यक पूर्व-शर्तों (Pre-requisites) के अनुपालन पर जोर दिया गया है। इस संबंध में जारी आदेश में सभी मंत्रालयों, विभागों, अधीनस्थ कार्यालयों और स्वायत्त संस्थानों को तय समयसीमा में आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है PFMS का ई-बिल सिस्टम
ई-बिल प्रणाली PFMS का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत दावे (Claims), स्वीकृति (Sanction), बिल निर्माण और भुगतान की पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से पूरी होती है। इसका उद्देश्य काग़ज़ी फाइलों की आवाजाही को खत्म करना, मानवीय हस्तक्षेप कम करना और भुगतान में होने वाली देरी को रोकना है। ई-बिल सिस्टम लागू होने से रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होती है और जवाबदेही भी बढ़ती है।
पूर्व-शर्तों के अनुपालन पर क्यों ज़ोर
CGA के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना तकनीकी और प्रशासनिक पूर्व-तैयारी के ई-बिल प्रणाली का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा। यदि किसी कार्यालय में आवश्यक सेट-अप अधूरा है, तो ई-बिल प्रोसेसिंग में रुकावट आ सकती है और भुगतान लंबित रहने की आशंका बढ़ जाएगी। इसलिए सभी संबंधित इकाइयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि PFMS में ई-बिल उपयोग से पहले सभी अनिवार्य शर्तें पूरी हों।
प्रमुख पूर्व-शर्तें क्या हैं
आदेश के अनुसार, सबसे पहले सभी डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer), पीएओ (Pay & Accounts Office) और स्वीकृति प्राधिकारी का PFMS में पंजीकरण और सही भूमिका निर्धारण जरूरी है। इसके अलावा स्वीकृति प्राधिकारियों का कोडिफिकेशन किया जाना अनिवार्य है, ताकि सिस्टम में स्वीकृति का स्रोत स्पष्ट रहे।
डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) भी ई-बिल प्रणाली का एक अहम हिस्सा है। दावे से लेकर अंतिम बिल जमा करने तक विभिन्न चरणों में डिजिटल हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। इसके लिए अधिकृत अधिकारियों को मान्य DSC प्राप्त कर PFMS प्रोफाइल से लिंक करना होगा।
तकनीकी और प्रशिक्षण संबंधी तैयारी
ई-बिल प्रणाली के लिए स्कैनर, कंप्यूटर, उपयुक्त ब्राउज़र और DSC ड्राइवर जैसी बुनियादी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी बताया गया है। साथ ही कर्मचारियों को ई-क्लेम, ई-सैंक्शन और ई-बिल की प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने पर भी बल दिया गया है, ताकि नई व्यवस्था में किसी तरह की भ्रम या त्रुटि न हो।
दस्तावेज़ों का डिजिटलीकरण
CGA ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी आवश्यक बिल, वाउचर और सहायक दस्तावेज़ों को निर्धारित फॉर्मेट और साइज में स्कैन कर PFMS पर अपलोड किया जाए। अपलोड किए गए दस्तावेज़ और सिस्टम में दर्ज विवरणों में一致ता (matching) होना जरूरी है, ताकि ऑडिट और सत्यापन के दौरान किसी तरह की समस्या न आए।
पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान की दिशा में कदम
वित्त मंत्रालय का मानना है कि ई-बिल प्रणाली से न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज़ होगी, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगेगी। सभी लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से निगरानी आसान होगी और हितधारकों का भरोसा बढ़ेगा।
निष्कर्ष
CGA और वित्त मंत्रालय का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले समय में सरकारी भुगतान व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होने की ओर बढ़ रही है। सभी विभागों और कार्यालयों के लिए यह जरूरी है कि वे PFMS के ई-बिल सिस्टम से जुड़ी सभी पूर्व-शर्तों का समय पर अनुपालन करें, ताकि सुचारु, पारदर्शी और जवाबदेह वित्तीय प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके।