
रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला: पूर्व सैनिकों की प्वाइंट्समैन के रूप में संविदा पर नियुक्ति योजना 31 दिसंबर 2028 तक बढ़ी
भारतीय रेलवे में सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पद प्वाइंट्समैन की कमी को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने एक अहम निर्णय लिया है। Railway Board ने आरबीई संख्या 03/2026 जारी करते हुए पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) को प्वाइंट्समैन के रूप में संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर नियुक्त करने की योजना की वैधता को 31 दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। यह आदेश रेलवे के संचालन को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, यह योजना तब तक लागू रहेगी जब तक नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से चयनित उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हो जाते। प्वाइंट्समैन का पद रेलवे के सबसे संवेदनशील और सुरक्षा-महत्वपूर्ण पदों में से एक है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही और ट्रैक प्वाइंट्स के संचालन से जुड़ा होता है।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य रेलवे में प्वाइंट्समैन पदों पर उत्पन्न अस्थायी कमी को पूरा करना है। कई ज़ोनल रेलवेज़ में नियमित भर्तियों में समय लगने के कारण यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे परिचालन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अनुशासित, प्रशिक्षित और अनुभवयुक्त पूर्व सैनिकों को संविदा आधार पर नियुक्त कर रेलवे अपने सुरक्षा मानकों को बनाए रखना चाहता है।
क्या है आरबीई 03/2026 का महत्व
रेलवे बोर्ड का यह नया आदेश पहले जारी दिशा-निर्देशों की निरंतरता में है। इससे पहले की योजना की अवधि समाप्त होने वाली थी, जिसे अब 31 दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस विस्तार के अलावा योजना की अन्य सभी शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी। यानी चयन प्रक्रिया, संविदा की अवधि, मानदेय और सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पूर्व सैनिकों को क्यों मिल रही है प्राथमिकता
पूर्व सैनिकों को इस योजना में शामिल करने के पीछे कई कारण हैं। सेना में सेवा दे चुके जवान अनुशासन, समयपालन, सुरक्षा नियमों के पालन और आपात स्थितियों से निपटने में दक्ष होते हैं। रेलवे जैसे बड़े और सुरक्षा-संवेदनशील संगठन के लिए ऐसे कर्मियों की उपलब्धता एक मजबूत सहारा बनती है। इसके साथ-साथ यह योजना पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है।
प्रशिक्षण और जिम्मेदारियां
संविदा पर नियुक्त किए जाने वाले पूर्व सैनिकों को प्वाइंट्समैन के रूप में कार्यभार संभालने से पहले निर्धारित प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान रेलवे सुरक्षा नियम, सिग्नलिंग प्रणाली, ट्रैक प्वाइंट्स का संचालन और आपातकालीन प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही उन्हें फील्ड में तैनात किया जाएगा।
नियमित भर्ती पर कोई असर नहीं
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल एक अस्थायी समाधान है। जैसे ही नियमित रूप से चयनित उम्मीदवार उपलब्ध होंगे, संविदा पर कार्यरत पूर्व सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य नियमित भर्ती को रोकना नहीं, बल्कि तब तक सुरक्षा और परिचालन को सुचारु बनाए रखना है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड का यह निर्णय भारतीय रेलवे और पूर्व सैनिकों – दोनों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। एक ओर जहां रेलवे को अनुभवी और अनुशासित मानव संसाधन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक रोजगार का अवसर प्राप्त होगा। 31 दिसंबर 2028 तक योजना की वैधता बढ़ाए जाने से यह स्पष्ट है कि रेलवे सुरक्षा और परिचालन निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।